Monday, April 6, 2026

युद्ध

जब युद्ध होते हैं 
खुश होते हैं गिद्ध 
लाशों के ढेर देखकर 
ऊंची आवाज में बोलते हैं भेड़िये
मांस के लोथड़े देखकर

सिर्फ जीत के लिए
नहीं होते युद्ध
गिद्धों व भेड़ियों की खाल में छिपे
इंसानों की भूख शांत करने को 
रचे जाते हैं युद्ध 
मरने का भय दिखाकर 
शांति का झूठ फैलाकर 
लाखों लाशें बिछाने के लिए 
लड़े जाते हैं युद्ध 
अहंकार की तृप्ति के लिए 
गढ़े जाते हैं युद्ध 
दौलत कमाने के लिए 
लड़े जाते हैं युद्ध 

Friday, February 20, 2026

दस्तक

कोई दस्तक नहीं देता अब दरवाजे पर 
इसीलिए इन दिनों खुला रहता है मेरा दर..
इसी आस में कि आएगा कोई
इक दस्तक सुनने को बेचैन मैं
हर छोटी सी आहट पर दौड़ पड़ता हूं
वक़्त की परछाईं पकड़ने.. लेकिन
वक़्त कब किसके हाथ आया है
हर बार वक़्त के फिसल जाने पर 
मैं कोसता हूं बीते वक़्त को 
मकड़ी के जाल से इस कालचक्र में 
उलझा हुआ सा मैं 
कर रहा हूं इक दस्तक का इंतजार...